चित्रकूट न्यूज़/बर्ड फ्लू के नियंत्रण वायरस की रोकथाम हेतु जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ की बैठक

*बर्ड फ्लू के नियंत्रण वायरस की रोकथाम हेतु जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ की बैठक*

चित्रकूट।जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय की अध्यक्षता में बर्ड फ्लू की रोकथाम हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जनपद में स्थापित बत्तख/पोल्ट्री एवं प्रवासी पक्षियों की गहनतापूर्वक तथा गम्भीरता पूर्वक सर्विलान्स किया जाये। इस हेतु बैकयार्ड पोल्ट्री, पोल्ट्री फार्म, पोल्ट्री दुकान/बाजार, प्रवासी पक्षियों के मार्ग, वन्य जीव अभ्यारण, पक्षी अभ्यारण, न, जलाशय, अर्न्तराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों का लगातार सर्विलान्स किया जाये। बर्ड फ्लू की किसी भी स्थिति से निपटने हेतु समस्त उपकरणों/सामग्री व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। कहीं भी पक्षियों की असामयिक एवं आकस्मिक मृत्यु की सूचना मिलने पर तहसील/जनपदीय नोडल अधिकारी द्वारा स्थान का भ्रमण किया जाये। भ्रमण के समय पीपीई किट का प्रयोग अवश्य किया जाये। जनपद में पशुपालन विभाग द्वारा कन्ट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है जिसका नम्बर दूरभाष टोलफ्री नम्बर 18001805141 पर कॉल करके जानकारी दे।
उन्होने निर्देशित किया है कि मुर्गियों/अन्य पक्षियों तथा अण्डो का परिवहन खुले वाहनों से न किया जाये जिससे परिवहन के दौरान उनके पंख/बीट इत्यादि बाहर न निकले। उन्होने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया जाये कि जितनी भी नॉनबेज की दुकाने है वहां पर निरीक्षण कर लिया जाये और बर्ड फ्लू के सम्बन्ध में सभी आवश्यक दिशा निर्देश दिये जाये। उन्होने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि बर्ड फ्लू हेतु सावधानियां बरतने के साथ साथ यह भी सुनिश्चित करें कि बर्ड फ्लू को लेकर आम जनता में अफवाहों के आधार पर अनावश्यक भय एवं भ्रान्ति न फैलने पाये। उन्होने जनपद एवं तहसील स्तर पर तैनात नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि बर्ड फ्लू की रोकथाम एवं बचाव हेतु सौपे गये दायित्वों का शत् प्रतिशत निर्वहन करें और इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही उदासीनता कदापि न बरती जाये।

*बर्ड फ्लू के नियंत्रण वायरस की बचाव व रोकथाम के बारे में क्या कहा पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ देव नारायण सिंह ने*
बर्ड फ्लू के बारे में पशु चिकित्सा अधिकारी ड़ॉ देव नारायण सिंह ने बताया कि बर्ड फ्लू पक्षियों में होने वाला विषाणु जनिक संक्रामक रोग है, सामान्यतः यह पक्षियों को ही संक्रमित करता है परन्तु इसके अतिरिक्त विपरीत परिस्थितियों में स्पीसीज बैरियर को क्रास कर यह मनुष्य को भी संक्रमित कर सकता है। उन्होने पक्षियों में रोग प्रसार के सम्बन्ध में बताया कि संक्रमित पक्षियों की आंख, श्वांस नलिका तथा बीट के सम्पर्क में आने से पक्षियों व मुनष्यों में फैलता है, संक्रमित पक्षियों व कुक्कुट प्रक्षेत्र के प्रयोग में आने वाली समस्त सामग्रियों व उपकरणों के सम्पर्क में आने से रोग फैल सकता है। पक्षियों में बर्ड फ्लू के लक्षण जैसे पक्षी को ज्वर आना, फैटल कलगी व पैरों का बैंगनी हो जाना, पक्षियों के गर्दन तथा आंखों के निचले हिस्से में सूजन व हरे व लालरंग की बीट है। जिलाधिकारी ने बर्ड फ्लू रोग से बचाव हेतु बताया है कि पक्षी फार्म, पक्षी अभ्यारण्य, जलाशय, झील के आस-पास न हों, पक्षी फार्म के आस-पास सूअर पालन न करें, फार्म के आस-पास साफ सफाई रखेंं तथा कूड़ा करकट व गन्दगी न इकट्ठा होने दें। मृत पक्षियों का डिस्पोजल/निस्तारण गड्ढे में दबाकर किया जाये। नियमित रूप से फार्म का लिटर बदलते रहें तथा समय-समय पर विसंक्रमण कार्यवाही करते रहे। उन्होने कहा कि कुक्कुट उत्पाद खाने से कोई नुकसान नही है, अण्डा, मॉस को खाने से पहले उसे खूब पकाकर ही खायें।

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