1️⃣8️⃣❗0️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ _एक राजा तीर्थ यात्रा के लिए चला।

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*_एक राजा तीर्थ यात्रा के लिए चला।* काफिले में एक गरीब आदमी भी था। वह दो धोती, कुछ खाने का आटा आदि साथ में लाया था। सुबह देखा सर्दी पड़ रही है, एक आदमी काँप रहा है तो उसने एक धोती उसे दे दी। वह पाकर प्रसन्न हुआ, आशीर्वाद दिया। उस समय ज्येष्ठ, आषाढ़ का महीना था। दोपहर में बड़ी कड़ी धूप पड़ती थी। उन लोगों को चलने के समय बादलों की छाया रहती थी। सब लोग कहते राजा साहब धर्मात्मा हैं, इनका प्रताप है।_

_एक आदमी ने कहा—क्या मालूम किसका प्रताप है?_
_राजा साहब ने कहा— बात ठीक है। न मालूम किसका प्रताप है? एक—एक आदमी चलो। देखें, बादल किसके साथ चलता है?_

_सब चले गए। वह जो गरीब आदमी था, जिसने एक धोती दान की थी, वही सोया रहा। बादल वही ठहरा रहा। वह जब चला तो बादल उसके साथ–साथ आया। यह निश्चय हो गया कि बादल इसी के ऊपर है। उससे पूछा गया कि आपने क्या दान किया? उसने कहा मैं तो क्या दान करने लायक हूँ। आप लोगों का सहारा लेकर आया हूँ। मेरे पास चीज ही क्या है, जो पुण्य-धर्म करूं?_
_प्रश्न—तुम घर से क्या लाए थे? उसने कहा — दो धोती और आठ-दस सेर आटा।_

_प्रश्न— धोती तो अब एक ही है। एक कहां गयी ?_
_एक आदमी कष्ट पा रहा था, उसे दे दी ।_

_एक महात्मा साथ में तो, उसने कहा एक धोती दान का यह माहात्म्य है।_
_राजा ने कहा महाराज! मैं तो लाखों रुपए दान करता हूं।_

_असल में पुण्य धर्म का लाभ रूपयों के पीछे नहीं है। एक रूपये से जो लाभ मिल जाता है, वह लाख रुपयों से भी नहीं मिलता। मौके से हो, अभाव में हो— उसका फल अधिक होता है..!!_
*🙏🏽🙏🏾🙏जय जय श्री राधे*🙏🏼🙏🏻🙏🏿

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