सतना ब्रेक:-नियमित करने को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

*सतना ब्रेक:-नियमित करने को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन!*
सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय सतना के रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को से नियमित करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
रोगी कल्याण समिति में मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित वर्ष 1995 से वर्तमान वर्ष 2021 लगातार 26 वर्षों से पूरी इमानदारी एवं निष्ठा के साथ नियमित कर्मचारी के जैसे निरंतर सेवाएं दे रहे हैं, जिनको ₹295 प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जा रहा है जो वर्ष 2015 से 2021 तक अवधि में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई, जीवन का महत्वपूर्ण समय रोगियों की सेवा करते करते बीत गया माननीय मुख्यमंत्री जी को दिनांक 28 जनवरी 2019 को ज्ञापन दिया गया था जिसके आदेश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सतना को पत्र क्रमांक/33/030-32/2009 कलेक्टर सतना की पत्र क्रमांक/33 द्वारा सूचित किया गया कि सिविल सर्जन सतना को 1 सप्ताह के अंदर कार्यवाही की जांच करके कार्यालय को सूचित करें!
रोगी कल्याण समिति के कार्यकर्ताओं के द्वारा पूर्व में लगभग 11 वर्षों से लगातार तकरीबन 10 10 बार जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन दिया गया है जो इस प्रकार है।
1) माननीय कलेक्टर महोदय जिला सतना मध्य प्रदेश!
2) मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला सतना मध्य प्रदेश!
3) सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय सतना!
4) विधायक जिला सतना मध्य प्रदेश!
5) सांसद जिला सतना मध्य प्रदेश!
6)राज्यमंत्री पिछड़ा वर्ग आयोग मध्यप्रदेश शासन भोपाल मध्य प्रदेश को लगातार सभी जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारियों को आवेदन के माध्यम से अवगत कराया गया है, अधिकारी द्वारा जवाब दिया जाता है कि रोगी कल्याण समिति के कार्यकर्ताओं को नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों में समयोजित करने के लिए 7 फरवरी 2019 में तीनों कार्यालय को आदेश जारी किया था। जिसके बाद भी भ्रष्ट अधिकारियों ने आदेश की अवहेलना की और आज दिनांक तक आदेश जारी नहीं किया जिस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाय। और रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों को नियमित किया जाए। अगर नियमित नहीं किया गया तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन भी किया जाएगा। इसके पूर्व में भी कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे पर प्रशासन द्वारा झूठे वादे किए गए और आंदोलन खत्म कराने के बाद जिया वादा भूल गए और तनख्वाह तो बड़ी नहीं और वैसे भी काट लिए गए कोरोना काल में कार्य करने का यह इनाम दिया गया?

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