*विश्व कुष्ठ निवारण दिवस (30 जनवरी) पर विशेष किसी को छूने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता कुष्ठ रोग*

विश्व कुष्ठ निवारण दिवस (30 जनवरी) पर विशेष

किसी को छूने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता कुष्ठ रोग

समय से इलाज कराएँ कुष्ठ रोग से मुक्ति पाएं

• 30 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान

चित्रकूट, 29 जनवरी 2021

कुष्ठ रोग जिसे लेप्रोसी भी कहते हैं, इस रोग और इसके रोगी को लेकर समाज में आज भी उतनी स्वीकार्यता नहीं है जितनी आज के समय में होनी चाहिए। आज भी लोग इस रोग के बारे में इसलिए खुलकर नहीं बताते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना न करना पड़े।

कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ इम्तियाज अहमद का कहना है- कुष्ठ रोग “माइको बैक्टेरियम लेप्रे” नामक जीवाणु के कारण होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह रोग मुख्यतः आँखों और नसों को प्रभावित करता है। अगर इस रोग में सही समय पर इलाज नहीं मिला तो रोगी दिव्यांग भी हो सकता है।
वह बताते हैं कि यह रोग कोई अभिशाप नहीं है, रोगियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नही करना चाहिए। सही समय पर इसका इलाज कराने से दिव्यांगता से बचा जा सकता है।

लक्षण

डॉ इम्तियाज बताते हैं – शरीर के किसी भाग पर गुलाबी धब्बे आना, सुन्नपन – उस जगह को महसूस नहीं कर पाना, उस स्थान पर पसीन नही आना, गांठ पड़ जाना या किसी नस का जरूरत से ज्यादा कड़ा या मोटा हो जाना, यह सब कुष्ठ रोग के लक्षण हैं।

कुष्ठ रोग दो तरह का होता है –

• पोसीवेस्लरी कुष्ठ रोग – शरीर पर 5 या उससे कम दाग हों तो उसे इस श्रेणी में डाला जाता है। इस रोग में इन्फेक्शन कम होता है और इसका इलाज 6 माह में पूरा हो जाता है।

• मल्टीवेस्लरी कुष्ठ रोग – शरीर पर 5 से अधिक धब्बे होने पर उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। यह नस को भी प्रभावित करता है, जिससे नस में मोटापन या कड़ापन आता है। इसका इलाज 12 माह चलता है।

डॉ इम्तियाज बताते हैं- कुष्ठ रोग को दो भाग में इसलिए वर्गीकृत किया गया है क्योंकि दोनों के इलाज में बहुत फर्क होता है। साथ ही लोगों को इस रोग से शर्म करने या किसी प्रकार की झिझक नहीं रखनी चाहिए। अगर समय रहते इसका इलाज नही होता है तो दिव्यांगता हो सकती है। कई मामलों में सर्जरी से दिव्यांगता भी दूर नहीं की जा सकती है। यह रोग छूने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है। रोगी के लगातार संपर्क में रहने से यह रोग फेलता है।
नोडल ने बताया कि स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान जिले में 30 जनवरी से 13 फरवरी तक संचालित किया जायेगा। इसके अंतर्गत ओपीडी में आने वाले मरीजों को कुष्ठ रोग के बारे में बताया जायेगा। साथ ही ग्राम प्रधान और सभासद द्वारा इस रोग के प्रति जागरूकता फैलाने को कहा गया है। साथ ही मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को भी इस रोग के प्रति जागरूक किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि जिले में जनवरी 2021 तक 28 नए मरीज़ मिले हैं।
इस वर्ष कुल सक्रिय मरीज– 35 हैं। इस वर्ष 47 लोगों को इस रोग से मुक्ति मिली है। जन समुदाय में जागरूकता लाने के लिए ही राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर कुष्ठ निवारण दिवस मनाया जाता है ]

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