जयपुर. प्रदेश की बिजली कंपनियों को नियंत्रित करने वाली राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (Rajasthan

जयपुर. प्रदेश की बिजली कंपनियों को नियंत्रित करने वाली राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (Rajasthan Electricity Regulatory Commission) ने बड़ी राहत देते हुए प्रदेश के प्राइवेट सोसाइटियों और बिल्डरों की बसाई कॉलोनियों में बनी बिल्डिंग और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट में विद्युत कनेक्शन लेने वालों को राहत दी है. विद्युत नियामक आयोग के मुताबिक, अब सोसाइटी की कॉलोनियों के मकानों पर विद्युत कनेक्शन के डिमांड नोटिस में प्रति वर्ग गज का चार्ज वर्तमान से आधा कर दिया है. आयोग ने इस संबंध में विद्युत सप्लाई कोड विनमय 2021 जारी किया है. यह सप्लाई कोड अब जयपुर ,जोधपुर अजमेर तीनों डिस्कॉम्स में लागू होंगे.

विद्युत विनियामक आयोग ने तीनों डिस्कॉम के उपभोक्ताओं सेवाओं में सुधार के लिए निर्देश भी दिए हैं. नियामक आयोग के मुताबिक, अब जहां भी विद्युत तंत्र है वहां पर अब 7 दिन में बिजली कनेक्शन डिस्कॉम्स को देना होगा ,वहीं नगर पालिका क्षेत्र में 15 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 दिन में बिजली कनेक्शन देने के निर्देश दिए गए है. विद्युत विनियामक आयोग के चेयरमैन से श्रीमंत पांडे सदस्य पृथ्वीराज ,एनसी दिनकर ने विद्युत सप्लाई कोड के मामले में अपना निर्णय दिया. बता दें कि इससे पहले विद्युत सप्लाई कोड साल 2004 में बना था.
विद्युत नियामक आयोग में इस तरह से किया प्रति वर्ग गज का शुल्क तय

विद्युत विनियामक आयोग ने सोसाइटी की कॉलोनी के मकान पर बिजली कनेक्शन की डिमांड नोटिस में प्रति वर्ष का चार्ज आधा किया है जिसमें नगर निगम क्षेत्र में 100 रुपए नगर परिषद क्षेत्र में 85 रुपये नगर पालिका क्षेत्र में 75 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 65 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया है.

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सप्लाई कोड में विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के लिए किए हैं प्रावधान

विद्युत विनियामक आयोग ने सप्लाई कोड में उपभोक्ताओं को कई सारे अधिकार भी दिए हैं जिसमें बिजली उपभोक्ता से जुड़ी सभी जानकारी संबंधित कार्यालय और वेबसाइट पर जारी की जाएगी. इसके अलावा विद्युत कनेक्शन और लोड या श्रेणी परिवर्तन आवेदन ऑनलाइन जमा हो सकेंगे. हार्ड कॉपी की अब जरूरत नहीं होगी. आवेदन पत्रों के लिए कंप्यूटराइज ट्रैकिंग सिस्टम की भी व्यवस्था की जाएगी ताकि उपभोक्ताओं को अपने आवेदन की स्थिति पता चल सके. वहीं अब हाई टैरिफ से लॉ टैरिफ में बदलाव हो सकेगा यानी सीधे तौर पर अबे अघरेलू से घरेलू श्रेणी भी बदली जा सकेगी. जिन उपभोक्ताओं के ज्यादा कनेक्शन है उनको सेंट्रलाइज पेमेंट की सुविधा भी दी जाएगी प्रीपेड मीटर की सुरक्षा राशि को 50 फ़ीसदी कम किया गया है. अब बिजली खाता का भी वार्षिक स्टेटमेंट देना होगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे में खराब मीटर विद्युत कंपनियों को बदलना होगा. सेल्फ मीटर रीडिंग का भी प्रावधान विद्युत नियामक आयोग ने किया है. इसके अलावा सभी सेवाओं के लिए एक ही फॉर्म का उपयोग तीनों बिजली वितरण निगम में किया जाएगा. सिक्योरिटी राशि वापस लेने के लिए अलग प्रमाणपत्र की जरूरत आगे से नहीं होगी. अंतिम बिल कोई प्रमाण पत्र माना जाएगा.

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