मेरठ. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले में ग्लेशियर (Glacier) टूटने के बाद तबाही का आलम

मेरठ. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली (Chamoli) जिले में ग्लेशियर (Glacier) टूटने के बाद तबाही का आलम है. इसका असर पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ सकता है. इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गंगा नदी के किनारे बसे जिलों को अलर्ट कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी हाई अलर्ट है. मेरठ के जिलाधिकारी के बालाजी पूरे अमले के साथ मवाना तहसील पहुंचे, जहां बैठक के बाद खादर क्षेत्र के गांवों में अलर्ट जारी किया गया. इसके साथ ही ज्यादा नीचले इलाके वाले गांवों को खाली कराने के निर्णय लिए गए. ऐसे लोगों को शासकीय आवासों व भवनों में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ से हो कर गुजरने वाली गंगा नदी में दो से तीन लाख क्यूसेक पानी बढ़ने की संभावना है. अधिकारियों का दावा है कि यदि बाढ़ की स्थिती बनती है तो प्रशासन हर स्तर पर निपटने को पूरी तरह तैयार है. अधिकारी खादर क्षेत्र में ही डटे हुए हैं. बताया जा रहा है कि चमोली में तबाही के बाद मेरठ के जिलाधिकारी हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में पहुंचकर खुद मोर्चा संभाला. क्षेत्र की जनता को चौकन्ना कर हर तरह की मुसीबत से निपटने की बात अधिकारियों ने कही है.

सिंचाई विभाग ने कसी कमर
बताया जा रहा है कि मेरठ के सिंचाई विभाग ने बाढ़ के हालात से निपटने के लिए कमर कस ली है. जिलाधिकारी के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अधिकारी पीके जैन अपनी टीम के साथ बाढ़ से निपटने के लिए गंगा किनारे पहुंच चुके हैं. पूरी निगरानी की जा रही है. सिंचाई विभाग ड्रेनेज खंड का पूरा अमला हस्तिनापुर गंगा तट पर पहुंच चुका है.

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