लखनऊ. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली में ग्लेशियर फटने (Chamoli Glacier Break) से आई त्रासदी को

लखनऊ. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली में ग्लेशियर फटने (Chamoli Glacier Break) से आई त्रासदी को लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का सिंचाई विभाग (Irrigation Department) हाई अलर्ट पर है. विभाग का अनुमान है कि उत्तराखंड से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी प्रदेश से गुजर रही गंगा नदी में पहुंचने के आसार हैं. लिहाजा विभाग ने नियंत्रण कक्ष में 24 घंटों के लिए अभियंताओं की तैनाती कर दी है. इतना ही जिन जिलों से गंगा नदी होकर गीजर रही हैं, वहां भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है. नदी के किनारे वाले इलाकों को खली भी करने का निर्देश दिया गया है.

सिंचाई विभाग के इंजीनियर और यूपी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव आशीष यादव ने बताया कि रविवार की रात हरिद्वार से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी यूपी में गंगा नदी में अतिरिक्त आने के आसार हैं. उन्होंने बताया कि केदारनाथ त्रासदी के समय हरिद्वारा से यूपी में करीब साढ़े छह लाख क्यूसेक पानी पास हुआ था. आशीष यादव ने कहा कि चूंकि सिंचाई विभाग ने गंगा नदी से निकलने वाली सभी नहरों की सिल्ट सफाई पहले ही समुचित तौर पर करवा रखी है. इसलिए यूपी में गंगा नदी में जल स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं हैं, हां यह जरूर है कि गंगा के जल प्रवाह में कुछ तेजी आ सकती है.

इन जिलों में अलर्ट

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने संबंधित विभागों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया। निर्देश के बाद गंगा किनारे बसे जिलों में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है, जिसमें कानपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, मेरठ, कन्‍नौज, बलिया, शाहजहांपुर, प्रतापगढ़ आदि शामिल हैं. वहीं, उन्‍होंने लोगों से कहा कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और न ही अफवाह फैलाएं. किसी विषम परिस्थिति के उत्पन्न होने पर जिला प्रशासन के साथ सहयोग करें. उत्तर प्रदेश सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है.

गंगा नदी के किनारे बसे जिलों को अलर्ट

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित जिलों के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को लगातार निगरानी के निर्देश दिये गये हैं. परिस्थितियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्‍य आपदा मोचक बल को भी अलर्ट कर दिया गया है. आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित जिलों में जल स्तर की निरंतर निगरानी की जा रही है. जल स्तर बढ़ने की दशा में आवश्यकता पड़ने पर नदी किनारे बसे लोगों को वहां से अन्य स्थानों पर भेजा जाएगा. राहत और बचाव के लिए निर्देश दिये जा चुके हैं.

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