अन्नाद्रमुक की सजायाफ्ता एवं निष्कासित महासचिव शशिकला नटराजन के सोमवार को तमिलनाडु में घुसने से लेकर चेन्नई पहुंचने तक लोगों का जैसा समर्थन और सम्मान उन्हें मिला,

अन्नाद्रमुक की सजायाफ्ता एवं निष्कासित महासचिव शशिकला नटराजन के सोमवार को तमिलनाडु में घुसने से लेकर चेन्नई पहुंचने तक लोगों का जैसा समर्थन और सम्मान उन्हें मिला, उससे मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में उलटफेर अवश्यंभावी है. द्रविड़ राजनीति की राजधानी चेन्नई में ही शशिकला के काफिले को कम से कम 50 जगह रोककर उनका काडरों ने बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया. उन्होंने ताजिंदगी राजनीति करते रहने और ‘अम्मा’ यानी दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की विरासत को जिंदा रखने का एलान करके मुख्यमंत्री एड्डापड्डी पलानीस्‍वामी को खुली चुनौती भी दे दी. पलानीस्‍वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक द्वारा शशिकला के पार्टी ध्वज के प्रयोग के खिलाफ पुलिस में शिकायत के बावजूद वे अन्नाद्रमुक का झंडा लगी गाड़ी में ही चेन्नई पहुंची हैं. उनके भतीजे एवं अम्मा मक्कल पार्टी के संचालक टीटीवी दिनाकरन ने जल्द ही अन्नाद्रमुक में भारी उथल पुथल का दावा किया है.

शशिकला ने साफ कहा कि अम्मा के बच्चे यानी अन्नाद्रमुक समर्थक अब उनके बच्चे हैं. जबरदस्त स्वागत से उत्साहित शशिकला ने लोगों को बोला कि जयललिता ने कहा था, ‘अन्नाद्रमुक का वजूद मेरे बाद भी 100 साल बरकरार रहेगा.’ इसलिए उनके अनुसार वे बाकी का जीवन पार्टी के कल्याण में ही समर्पित करेंगी. उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले भी चुनाती झेली हैं और हरेक संघर्ष से तप कर यह और भी निखरी है. उन्होंने काडर से एकजुट रहकर राजनीतिक दुश्मन को सत्ता से दूर रखने और फूट डालने की साजिश से बचने की अपील की है. शशिकला ने पार्टी में अपने ताजा विरोधियों का बिना नाम लिए कहा कि चुनींदा लोगों के निजी फायदे के लिए इस ऐतिहासिक समृद्ध आंदोलन को बिखरने कतई नहीं देंगी. उन्होंने चुनाव हर हाल में जीत कर अम्मा को विजय समर्पित करने का आह्वान किया. जुलूस में शामिल लोग उनसे अन्नाद्रमुक की बागडोर फिर से संभालने की अपील कर रहे थे. वे पार्टी दफ्तर भी जाएंगी क्या के जवाब में उन्होंने जल्द ही प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बात कहने का आश्वासन पत्रकारों को दिया.

शशिकला को समर्थन और उनके तेवर देखकर मुख्यमंत्री पलानीस्‍वामी व उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम की नींद हराम होना तय है. अब तमिलनाडु में राजनीति की हांडी तेजी से खदबदाएगी. उनकी वापसी के तीन दिन पहले ही उनके पूर्व चहेते मगर अब घोर प्रतिद्वंद्वी पलानीसामी ने किसानों के लिए 12,110 करोड़ रुपए की कर्ज माफी की है. उन्होंने साल 2017 में जल्‍लीकट्टू पर रोक के विरोध में हुए आंदोलन में नामजद सभी लोगों पर पुलिस में दर्ज मुकदमे खारिज करने के आदेश भी जारी कर दिए. इससे पहले वे 80 करोड़ रुपए से जयललिता की समाधि पर बने भव्य स्मारक का उद्घाटन भी कर चुके. पलानीस्‍वामी द्वारा चुनाव में खुद को दुबारा मुख्यमंत्री का उम्मीदवार भी पार्टी से घोषित करवाया जा चुका. इन घोषणाओं के जरिए पलानीस्‍वामी सरकार ने अपने राजनीतिक सहयोगी बीजेपी की सलाह पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक किलेबंदी की है.

पलानीस्‍वामी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद शशिकला की अन्नाद्रमुक में वापसी की संभावना से भी साफ इनकार कर चुके.

उससे पहले आरएसएस के सलाहकार एवं तुगलक पत्रिका के संपादक एस गुरूमूर्ति द्वारा द्रमुक को हराने के लिए शशिकला को साथ रखने की सलाह दे चुके हैं. तभी से शशिकला के प्रति बीजेपी के रूख की अटकलें लग रही हैं. हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि शशिकला से जुड़ कर चुनाव लड़ने पर बीजेपी के भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद विरोधी अभियान का क्या होगा. क्योंकि शशिकला तो भ्रष्टाचार में चार साल कैद काट चुकीं और उस दौरान उनके भतीजे एवं अम्मा मक्कल के प्रभारी टीटीवी दिनाकरन ने ही राजनीति में जिंदा रखा. अम्मा मक्कल के झंडे तले दिनाकरन दिवंगत जयललिता की सीट आर के नगर से विधानसभा चुनाव जीत चुके. अम्मा मक्कल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी चार फीसद से अधिक वोट हासिल किए थे. द्रमुक के हाथों अन्नाद्रमुक के 38 सीटों पर लोकसभा चुनाव हारने में अम्मा मक्कल को पड़े वोटों को जिम्मेदार माना जा रहा है. शशिकला राज्य के राजनीतिक रूप में संगठित थेवर समुदाय से हैं जो अन्नाद्रमुक के प्रमुख समर्थक हैं.

जयललिता के काल में भी शशिकला की समानांतर सत्ता थी. पार्टी काडर एवं नेता उन्हें चिनम्मा यानी छोटी मां पुकारते तथा उनकी बात का मान रखते थे.

थेवर तमिलनाडु की प्रभावशाली अन्य पिछड़ी जाति है जिसके नाराज होने पर अन्नाद्रमुक को सत्ता से हाथ धोने पड़ सकते हैं. तीन उपजातियों- मारावर कल्लार एवं अगमुदैयार. को मिलाकर थेवर समुदाय बनता है. थेवर अधिकतर दक्षिण तमिलनाडु में बसे हैं. ओ पन्नीरसेल्वन भी थेवर ही हैं और पलानिस्वामी उनके समुदाय के वोट पाने को उन्हें उपयोगी मान रहे हैं मगर शशिकला के आगे वे फीके पड़ते हैं. इसीलिए गुरूमूर्ति ने बीजेपी और अन्नाद्रमुक को शशिकला को साथ रखने की सलाह दी है. अदालत द्वारा जे दीपा और उनके भाई को जयललिता का वैध वारिस घोषित किया जा चुका. इसलिए अब वही दोनों अपनी बुआ की सारी संपत्ति के मालिक होंगे. दीपा ने पोएस गार्डन की कोठी पर कब्जे के लिए भी दरख्वास्त लगा रखी है. दीपा ने दिसंबर 2017 में जयललिता के विधानसभा क्षेत्र आरके नगर से उपचुनाव भी लड़ा था.

शशिकला को कैद के दौरान ही द्रमुक के मुखिया एम करुणानिधि अगस्त 2018 में दुनिया छोड़ चुके. अब उनका मुकाबला करुणानिधि के छोटे बेटे एवं द्रमुक महासचिव एम के स्टालिन से है. द्रमुक द्वारा कांग्रेस, वीसीके आदि दलों सहित अपने गठबंधन का चुनाव प्रचार शुरू किया जा चुका. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी पिछले महीने में राज्य का पहले सांस्कृतिक, फिर चुनावी दौरा कर चुके. सुपरस्टार रजनीकांत राजनीति में प्रवेश और फिर स्वास्थ्य की दुहाई देकर उससे दूर रहने की घोषणा कर चुके हैं. अलबत्ता उनके प्रबल समर्थक अर्जुनामूर्ति राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने और ‘तलैवा’ द्वारा चुनाव से पहले किसी धमाकेदार एलान का सुर्रा छोड़कर राजनीति का लोहा तपा रखा है. दूसरे सुपरस्टार कमला हासन ने अपने दल मक्कल नीधी मैयम यानी एमएनएम के ओवैसी के एआईएमआईएम से गठबंधन की सुगबुगाहट अलग पैदा कर रखी है. एमएनएम 2019 के आम चुनाव में साढ़े तीन फीसद वोट पा चुकी है.

शशिकला ने सजा काटने के लिए बेंगलुरू रवाना होने से पूर्व ही जयललिता की समाधि पर तीन बार पांव पटक कर उनकी कथित विरासत को जिंदा रखने का संकल्प किया था.

हालांकि जयललिता की विरासत में भ्रष्टाचार की वो सजा भी है जो सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शशिकला के साथ सुनाई थी मगर दिवंगत हो चुकने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री उससे बच गईं. जयललिता-शशिकला एवं दो अन्य के विरूद्ध सुनाया गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला नेताओं के खिलाफ सजा का अनुमन्य दस्तावेज हैं. उसमें सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की भी निचली अदालत का फैसला पलट कर दोषियों को रिहा करने के लिए डटकर निंदा की. उपमुख्यमंत्री एवं अन्नाद्रमुक के समन्वयक ओ पन्नीरसेल्वम ने हालांकि शशिकला के जेल से छूटने पर खुशी जताने वाला पोस्टर लगाने पर पार्टी पदाधिकारी को दलनिकाला दे दिया था मगर चेन्नई में उनके स्वागत के लिए जुटी भीड़ से वे कैसे पार पाएंगे. देखना यही है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आय से 66 करोड़ रुपए अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून में चार साल की कैद एवं 10 करोड़ रूपए जुर्माने की सजा काटने का दाग शशिकला के लिए राजनीतिक चुनौती बनेगा अथवा वरदान. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)

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