लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों सबसे ज्यादा बेसब्री आरक्षण की स्थिति को लेकर है

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों सबसे ज्यादा बेसब्री आरक्षण की स्थिति को लेकर है. हर कोई जानना चाहता है कि उसकी सीट की क्या स्थिति बनेगी? खासकर चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे नेता. आशा है कि अगले एक-दो दिनों में ही तस्वीर साफ हो जाएगी. सरकार इसी हफ्ते आरक्षण का शासनादेश जारी कर सकती है क्योंकि उसे 17 मार्च से पहले इस काम को खत्म कर लेना है. तो क्या आरक्षण का शासनादेश जारी होने से स्थिति साफ हो जायेगी कि कौन सी सीट आरक्षित होगी और कौन सी सामान्य? जी नहीं. ऐसा नहीं है.

दरअसल शासनादेश जारी होने के बाद सरकारी भाषा को समझने वाले लोगों को बहुत हद तक उसका अंदाजा जरूर हो जायेगा. आपको बता दें आरक्षण का शासनादेश आरक्षण की लिस्ट नहीं होती है बल्कि उसमें आरक्षण तय करने के तरीके और उसकी समय सीमा का जिक्र होता है. आरक्षण का शासनादेश शायद कल-परसों में जारी हो जाए तो भी लिस्ट जारी होने में समय लगेगा. आम तौर पर ये देखा गया है किे शासनादेश जारी होने के बाद आरक्षण की लिस्ट जारी होते-होते एक महीना बीत जाता है.

पंचायती राज निदेशालय जिलों को भेजेगा पदों का आवंटन

हालांकि सरकार शासनादेश के जरिये लिस्ट जारी करने की समय-सीमा भी तय कर सकती है. जीओ जारी होने के बाद लिस्ट जारी होने तक कई चरण पूरे करने होते हैं. जीओ जारी होने के बाद सबसे पहले पंचायती राज निदेशालय आरक्षण के हिसाब से पदों का आवंटन करता है और उसे जिलों में भेजता है. यानी जिले के कुल पदों में से इतनी सीटें रिजर्व रहेंगी और इतनी सामान्य, ये जानकारी जिला प्रशासन को भेजी जायेगी. इसमें इस बात का जिक्र होता है कि कितनी सीटें किस कैटेगरी के लिए रिजर्व होंगी?

जिला प्रशासन तय करेगा आरक्षण

लिस्ट के मिलने के बाद जिला प्रशासन जनसंख्या के आधार पर ये तय करता है कि कौन सी सीट किस कैटेगरी के लिए रिजर्व होगी? जिस फार्मूले पर जिला प्रशासन आऱक्षण तय करेगा, उसका जिक्र शासनादेश में होता है. सीटवार आरक्षण तय करने के बाद जिला प्रशासन लिस्ट जारी कर देता है. आपत्तियों का निस्तारण ये बहुत जरूरी प्रक्रिया है. जिला प्रशासन जारी किये गये आरक्षण की सूची पर आम जनता से आपत्तियां मांगता है. आम तौर पर आपत्तियों के लिए एक हफ्ते का समय निर्धारित होता है लेकिन, सरकार इसे घटा-बढ़ा सकती है. आपत्तियों के आने के बाद एक हफ्ते के भीतर इसका निस्तारण जिले स्तर पर किया जाता है.

संशोधित सूची निदेशालय को भेजना

आपत्तियों के निस्तारण के बाद जिला प्रशासन यदि कोई संशोधन हुआ तो उसे करके अंतिम सूची पंचायती राज निदेशालय को भेजता है. निदेशालय इसका अध्ययन करने के बाद वापस जिला प्रशासन को भेजता है.

जिला प्रशासन तब करेगा आरक्षण सूची का अंतिम प्रकाशन

निदेशालय से सूची मिलने के बाद जिला प्रशासन आरक्षण लिस्ट का अंतिम प्रकाशन करता है. इसी लिस्ट के जरिये इस बात का खुलासा होता है कि कौन सी सीट किस कैटेगरी में रिजर्व है या कौन सी सीट रिजर्व से सामान्य हो गयी है. इतने चरणों को पूरा करने के बाद हमारे मतलब की बात सामने आती है. यानी इतनी प्रक्रियाओं के बाद ये पता चलता है कि किस सीट की क्या स्थिति है. ऐसे में थोड़ी धीरज रखने की जरूरत है क्योंकि सीटों पर आरक्षण की स्थिति जानने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा.

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