नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कांग्रेस और उसके नेता अधीर रंजन चौधरी पर निशाना भी साधा और तंज भी कसे.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कांग्रेस और उसके नेता अधीर रंजन चौधरी पर निशाना भी साधा और तंज भी कसे. पीएम ने कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस के लोग कृषि कानूनों (Farm Laws) की हर पहलू पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उसके कंटेंट पर चर्चा नहीं की. उन्होंने कहा कि “कांग्रेस के नेता हर पहलू पर खूब चर्चा कर रहे थे, अच्छा होता उसके कंटेंट पर चर्चा करते, अच्छा होता उसके इंटेंट पर चर्चा करते. ताकि देश के किसानों को भी सही चीज पहुंच सकती थी. मुझे विश्वास है कि दादा ने भी भाषण किया. मुझे लगा दादा (अधीर रंजन चौधरी) अच्छी बात बताएंगे, लेकिन उन्होंने पीएम बंगाल में क्यों यात्रा कर रहे हैं, उसी पर लगे रहे, खैर चुनाव के बाद आपके पास मौका होगा तो.. ये इतना महत्वपूर्ण प्रदेश है इसीलिए तो हमलोग कर रहे हैं, आपलोगों ने इसे इतना पीछे छोड़ दिया, इसीलिए तो हम इसे प्रमुखता देना चाहते हैं.”

“दादा, अब ज्यादा हो रहा है”

प्रधानमंत्री ने कहा, “दिल्ली के बाहर लोग धरने पर बैठे हैं. किसान गलत धारणाओं का शिकार हुए हैं. आंदोलन कर रहे सभी किसान साथियों की भावनाओं का ये सदन और सरकार आदर करती है. ये किसान साथियों का सम्मान कर रहे हैं, आदरभाव के साथ कर रहे हैं.” विपक्ष के नेताओं की ओर से नारेबाजी और हंगामे के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि कानून बनने के बाद पुरानी मंडी व्यवस्था कायम है और ये लोगों के ऊपर है कि वे किस मार्केट में अपनी उपज बेचना चाहते हैं. इस बीच विपक्षी नेताओं खासकर अधीर रंजन चौधरी और कांग्रेस की ओर से बार-बार टोकाटोकी पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दादा, अब ज्यादा हो रहा है.

ना खेलब ना खेले देब, खेलिए बिगाड़ब

अधीर रंजन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपको भी मौका मिलेगा, घबराइए मत टीएमसी से भी ज्यादा आपको बंगाल में पब्लिसिटी मिल जाएगी. प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में दोहराया कि दादा अब ज्यादा हो रहा है. हंगामे के बीच कांग्रेस ने वॉकआउट किया तो प्रधानमंत्री ने कहा कि “ये पार्टी ना अपना भला कर सकती है और ना दूसरों. इनका मूलमंत्र है. ना खेलब ना खेले देब, खेलिए बिगाड़ब.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में हमारे किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है. छोटे किसानों की मुश्किलों को दूर करना होगा. सिर्फ गेहूं और चावल उगाने से किसानों का लाभ नहीं होगा. कच्छ और बुंदेलखंड में किसान स्ट्राबेरी उगा रहे हैं और इससे पता चलता है कि देश में संभावनाओं की कमी नहीं है. छोटे किसानों को हमने बीज से लेकर बाजार तक सबकुछ उपलब्ध कराया है. कोई नहीं चाहता किसान गरीबी के चक्र में फंसे. खेती को आधुनिक बनाना होगा. हमारी सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा, “एक नई दलील आई कि जब मांगा ही नहीं है तो कानून क्यों बना दिया. लेकिन वे भूल जाते हैं कि दहेज के खिलाफ किसी ने कानून नहीं मांगा, बाल विवाह के खिलाफ किसी ने कानून नहीं मांगा था, किसी शिक्षा के अधिकार के कानून नहीं मांगा था… लेकिन देशहित में कानून बना. किसी ने मांगा नहीं था.”

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