नई दिल्ली. पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े एक मामले को केन्द्र सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है.

नई दिल्ली. पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े एक मामले को केन्द्र सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है. यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में विचाराधीन था. लेकिन कोर्ट का फैसला आने के बाद अब इसे सरकार की भी मंजूरी मिल गई है. लोकसभा में एक सांसद के सवाल के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी है. सरकार के इस कदम से बड़ी संख्या में केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा. इस मामले में कई कर्मचारियों ने कोर्ट का रुख किया था. कई साल तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला आया है. अब कर्मचारियों को पुरानी पेंशन (Pension) व्यवस्था के तहत ही रिटायर होने पर पेंशन का लाभ मिलेगा.

बड़ी संख्या में केन्द्र सरकार के अधीन ऐसे कर्मचारी थे जिन्हें नई पेंशन व्यवस्था राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत भर्ती किया गया था. लेकिन कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले ऐसे कर्मचारियों का आरोप था कि वो साल 2004 से पहले सफल घोषित किए गए थे. चयन भी 2004 से पहले हो गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति 2004 के बाद हुई.

इसी तरह के और भी कई कारण थे जिसके चलते उनकी नौकरी 2004 के बाद शुरु हुई थी. और इसी के चलते सरकार ने उन्हें एनपीएस के तहत रखा था. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर फैसला देते हुए कहा था कि सरकार ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का ही लाभ दे. जिसे सरकार ने मान भी लिया है.

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पैरामिलिट्री फोर्स की पेंशन के लिए लड़ रहे हैं लड़ाई

वैसे तो देशभर में किसी एक नहीं दर्जनों विभाग में पेंशन की नई व्यवस्था एनपीएस लागू कर दी गई है. लेकिन 2004 से सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स में भर्ती होने वाले जवानों को भी नई पेंशन स्कीम के तहत रखा गया है. पेंशन दोबारा से चालू हो जाए. पहले की तरह ही पुरानी पेंशन का लाभ मिलता रहे इसके लिए सीआरपीएफ के आईजी रिटायर्ड वीपीएस पनवर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं.

नेशनल कोआर्डिनेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री पर्सनल वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमेन वीपीएस पनवर बताते हैं कि मैं पिछले 4 साल से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहा हूं. इस बारे में गृह मंत्रालय और पीएमओ सहित सभी संबंधित विभागों को दर्जनों चिठ्ठी लिखी जा चुकी हैं. लेकिन हैरत की बात ये है कि पीएमओ को छोड़कर किसी ने भी आजतक एक भी चिठ्ठी का जवाब नहीं दिया है. पीएमओ से आई चिठ्ठी में भी सिर्फ इतना ही लिखा था कि आपकी चिठ्ठी को हमने संबंधित विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है.

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