लखनऊ. उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनावों का ऐलान हो चुका है

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनावों का ऐलान हो चुका है. हाईकोर्ट (HC) की फटकार के बाद आखिरकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में अध्यक्ष और सदस्यों के चुनावों के लिए अधिसूचना जारी हो गई है. जारी अधिसूचना के मुताबिक 3 मार्च तक अंतिम निर्वाचक नामावलियों का प्रकाशन होगा. इसके बाद 4 मार्च को सुबह 11 बजे से 3 बजे तक प्रत्याशी अपना नामांकन कर सकेंगे. इसके साथ ही शाम 4 बजे के बाद ही 4 मार्च को ही नामांकन पत्रों की जांच होगी. 5 मार्च तक प्रत्याशी अपना नामांकन वापस ले सकेंगे. फिर 6 मार्च को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान किया जाएगा. 6 मार्च को ही शाम 5 बजे से मतगणना होगी और देर रात तक नतीजे आ जाएंगे.

ये है सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की चुनावों की प्रक्रिया

माना जा रहा है उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व नहीं होगा. बोर्ड में जिस कोटे से सदस्य चुनकर आते हैं. उनमें बीजेपी के सदस्य काफी कम हैं. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का संचालन बोर्ड करता है और इस बोर्ड में 11 सदस्य होते हैं. यह सभी 11 सदस्य मिलकर एक चेयरमैन चुनते हैं. बोर्ड के सदस्यों के लिए 2 सुन्नी मुस्लिम सासंद, 2 मुस्लिम सुन्नी MLA या विधान परिषद के सदस्य, 2 बार काउंसिल के सदस्य, 2 मुतावल्ली कोटे के सदस्यों का चुनाव किया जाता है. इसके अलावा राज्य सरकार एक मौलाना और एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ 1 पीसीएस रैंक का सुन्नी मुस्लिम अधिकारी नामित करती है. जिसके बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू होती है.

मौजूदा संसद में बीजेपी के जफरुल इस्लाम के अलावा समाजवादी पार्टी के 3 और बीएसपी के 3 सांसद सुन्नी मुस्लिम हैं. इससे जाहिर है कि ऐसी स्थिति में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के सांसदों का वर्चस्व चुनावों में रहेगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में भी बीजेपी का एक भी सदस्य सुन्नी मुस्लिम नहीं है, जबकि समाजवादी पार्टी के 13 बीएसपी के 5 और कांग्रेस के 2 विधायक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे.

मुतावल्ली कोटे के सदस्यों के चुनाव पर रहेगी नजर

वक्फ बोर्ड में एक लाख से अधिक वक्फ संपत्ति वाले औकाफ में मुतावल्ली कोटे से चुनाव में उतरेंगे. इस कोटे में 600 से अधिक लोग आते हैं.

इमरान और अब्दुल रज्जाक बार काउंसिल से निर्विरोध सदस्य चुने जा सकते हैं

इस बार के भी चुनावों में बार काउंसिल के सदस्य इमरान खान और अब्दुल रज्जाक खान ही मात्र दो ऐसे सदस्य हैं, जो मुस्लिम हैं और सुन्नी हैं. ऐसे में इन दोनों का निर्विरोध चुना जाना तय है. यह दोनों निवर्तमान बोर्ड में भी सदस्य हैं.

जुफर फारुकी के सर फिर सजेगा ताज

बोर्ड के सबसे प्रभावशाली अध्यक्ष रहे जुफर फारुकी पर सबकी नजरें रहेंगी. जुफर फारुकी अध्यक्ष पद खत्म होने के बाद बाद भी अध्यक्ष बने रहे. उन्हें सरकार की तरफ से 2 बार एक्सटेंशन दिया गया. लेकिन बाद में मामला कोर्ट चला गया और कोर्ट ने चुनाव कराने का आदेश दिया.

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