चित्रकूट.. नगर के एस0 डी0 एम0 कालोनी स्थित डाॅ0 भाभा काॅन्वेन्ट स्कूल में भारतीय साहित्यिक संस्थान के संस्थापक स्व./ news11 इंडिया टीवी से राहुल साहू संवाददाता पहाड़ी चित्रकूट

चित्रकूट.. नगर के एस0 डी0 एम0 कालोनी स्थित डाॅ0 भाभा काॅन्वेन्ट स्कूल में भारतीय साहित्यिक संस्थान के संस्थापक स्व. डॉ. देशराज पाण्डेय की 13 वीं पुण्यतिथि “पुष्पांजलि” कार्यक्रम के रूप में मनाई गई। इस उपलक्ष्य पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि एवं संस्था के संरक्षक डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह “भ्रमर” ने माँ सरस्वती की प्रतिमा एवं स्व0 देशराज पाण्डेय की प्रतिमा में दीप प्रज्वलन कर माल्यार्पण किया। इसके पश्चात डाॅ0 भाभा काॅवेन्ट स्कूल के संगीत शिक्षक वैभव जेजु़रकर ने माँ सरस्वती की वंदना “माँ शारदे हँसासिनी वागेश वीणा धारिणी” प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन कवि मनीष गर्ग ने किया। काव्य पाठ की श्रंखला में सबसे पहले नन्हीं कवियित्री प्रियांशी सिंह पल्लवी ने अपनी रचना ” मैं भी उस उपवन की कलिका, नित जिसमें शब्द पुष्प खिलते। उस महामना से अभिचिंतित, आशीष भरे संबल मिलते” सुनाकर जादू बिखेर दिया। वहीं युवा कवि जय अवस्थी ने अपनी रचना “लगती न फटकार हमें, तो बलशाली कौन करता, पिता है तो रंग है जीवन में खुशियों के वर्ना होली को होली दीवाली को दीवाली कौन करता है ” सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरी। कवि अम्बिका मिश्र प्रखर ने “आहों के अंबार खड़े हैं, देखो तपती राहों में, और चांदनी नाच रही चंदानी बाहों में। कवि मनीष गर्ग मनीष ने” अपनी रचना “ऋणी रहेंगे हम सब उनके भगीरथी प्रयास में, शत प्रणाम शत शत वंदन उनके सन्यासी जीवन में” प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। कवियित्री श्रीमती शशि यादव ‘मंजरी’ ने ‘ भगवान राम की भक्ति पर आधारित रचना “राम सा धैर्य होना कठिन है बहुत, राम भक्ति मिले यह कठिन है बहुत” प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्ति के रंग में रंग दिया। हास्य कवि शिवपूजन सिंह सुमन ने अपनी हास्य रचना “तुम हो सबके कृपानिधान, विनती सुन लो हे भगवान, हमें परधान बनावा अबकी प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया । कवि जितेंद्र कुमार नामदेव ने “हमें चाहिए दीवाली की सस्ती वाली झालर, कोट के भीतर शर्ट न पहने चाहिए बस कालर, जेब में नहीं फूटी कौड़ी, बात करें हम डालर की,ऐसे में सीके हम केबी हमसे न हो पाएगा। कवि गुरु प्रसाद ने “आधा कुन्तल शुध्द जनेऊ रोज उतारा जाता था, अपनी आंखों कन्याओं को जब नग्न निहारा जाता था”। प्रसिद्ध गीतकार एवं गज़लकार अख़्तर फराज़ ने अपना शेर “दर्द दिल की दवा मिलती नहीं, चाहने से भी वफा मिलती नहीं” प्रस्तुत की। गणेश मिश्र ने “बन दीपक जल अंधेरे में जो मुझे रोशनी देता था, एक फरिश्ता ऐसा मैंने अपने वालिद के रूप देखा था” डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह ‘भ्रमर ने अपनी रचना “शब्दों के चिंतक चषकों मधु वर्णो के मतवाले थे कवि थे, कवि कुल सरक्षक थे, कविता को जीने वाले थे” । इसी क्रम में एक और रचना ” राजमार्ग पर खूंटा गाड़े, कैसी है हठधर्मी, कृषकों के यह छद्म वेश में, है आंदोलन वर्मी ” प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन जीत लिया, प्रेमचंद्र यादव ने स्व. देशराज पाण्डेय के बारे में बताया कि जब भी कोई उनसे मिलता था, तो मिलने वाले को ऐसा लगता था कि वे केवल अपने ही हैं , हम से प्रिय और कोई नहीं।
भारतीय वायुसेना के पूर्व सैनिक एवं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल तिवारी ने अपने जीवनकाल के जब वे श्रीलंका गये थे, अनुभव साझा किये। संस्था के महासचिव डाॅ0 मनोज द्विवेदी ने बताया कि प्रख्यात कवि एवं गीतकार गोपालदास “नीरज” डॉ. देशराज पाण्डेय के निवेदन पर कर्वी पधारे थे और “नीरज निशा” कार्यक्रम संस्थान द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमे कर्वी ‘सब डिवीजन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रोहित नन्दन देर रात्रि तक पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्हीं की देखरेख में पूरा कार्यक्रम चला, इसी प्रकार डॉ. हरवंश राय बच्चन से भी डॉ. पाण्डेय के आत्मीय सम्बन्ध थे, संस्थान के कार्यक्रम में पहुँच न पाने पर उन्होंने अपनी पत्नी श्रीमती तेजी बच्चन को डॉ . पाण्डेय जी के पास भेजा था कि डॉ . पाण्डेय जी से मिलकर बोलियेगा कि अत्यधिक व्यस्तता के कारण मैं नहीं आ सकता,क्षमा प्रार्थी हूँ, कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनोज द्विवेदी ने आये सभी प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर भाजपा नेता पंकज अग्रवाल सुधाकर राव, श्रीमती विनीता पाण्डेय, दिव्या पाण्डेय, डाॅ0 वैभव द्विवेदी, गौरव द्विवेदी, विमल कुमार यादव, नीरज यादव, अरविन्द यादव, प्रेमचन्द्र, बुद्धविलास यादव, शिवसरन, अखिलेश कुमार, कौशल यादव आदि मौज़ूद रहे। रिपोर्ट.शंकर यादव चित्रकूट

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