चित्रकूट की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने से तमाम दिग्गजों की चुनावी गणित बिगड़ गई

चित्रकूट की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने से तमाम दिग्गजों की चुनावी गणित बिगड़ गई है। बीते साढ़े सात साल से इस सीट में समाजवादी पार्टी का कब्जा है लेकिन नए आरक्षण ने उसे भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

चित्रकूट जिला का सृजन छह मई 1997 को बांदा जनपद को विभाजित कर हुआ था। पहली जिला पंचायत का गठन 11 सदस्यों के साथ हुआ था। छह अध्यक्ष हो चुके हैं। जबकि दो बार अविश्वास प्रस्ताव में चुनाव हुए हैं। एक बार फिर चुनावी बिगुल बज गया है। सरकार ने आरक्षण नीति साफ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों का एलान भी कर दिया है। चित्रकूट की सीट पहली बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है। इसके पहले यह सीट अनारक्षित, पिछड़ा वर्ग, महिला व महिला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुकी है। वर्तमान में सपा की मैना देवी अध्यक्ष हैं लेकिन अब सीट एससी के लिए आरक्षित होने से उनके चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया है।

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राजनीतिक दल खोजने लगे प्रत्याशी

नए आरक्षण से सभी दलों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है महंगे हो चुके जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए सुयोग्य प्रत्याशी की खोज की जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दल में अनुसूचित जाति के नेताओं को लेकर चर्चा शुरू है। भाजपा, सपा व बसपा में ऐसे नेता की खोज हो रही जो जिताऊ व धन से मजबूत हों।

बद्री बने थे पहले अध्यक्ष

चित्रकूट जिला पंचायत में अभी तक छह अध्यक्ष हो चुके हैं पहले अध्यक्ष भाजपा के बद्री विशाल त्रिपाठी हुए थे। उनका कार्यकाल करीब ढाई साल का था। वर्ष 2000 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी और भाजपा की उजरिया देवी अध्यक्ष बनी थी। वीर सिंह हुए थे निर्विरोध अध्यक्ष

वर्ष 2005 में सपा के वीर सिंह पटेल निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। उस समय उनके पिता दस्यु शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ जिदा थे। जिनके डर से उनके सामने कोई चुनाव में नहीं उतरा था।

अविश्वास प्रस्ताव में बने थे शिवशंकर अध्यक्ष

वर्ष 2010 में यह सीट बसपा के खाते में चली गई थी। जब रमेश पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे लेकिन सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद उनकी कुर्सी चली गई। वर्ष 2012 में सपा सरकार बनने अविश्वास प्रस्ताव से रमेश पटेल को हटाकर शिवशंकर सिंह यादव अध्यक्ष बन गए थे। ढाई साल बाद वर्ष 2015 में हुए चुनाव में महिला सीट से शिवशंकर सिंह यादव की पत्नी मैना देवी अध्यक्ष चुनी गई। उनके खिलाफ भी एक बार अविश्वास प्रस्ताव आया और चुनाव हुआ लेकिन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रही।

अभी तक के जिला पंचायत अध्यक्ष

वर्ष 1997 से 2000 तक – बद्री विशाल त्रिपाठी (भाजपा)

वर्ष 2000 से 2005 तक – उजरिया देवी (भाजपा)

वर्ष 2005 से 2010 तक- वीर सिंह पटेल (सपा)

वर्ष 2010 से 2012 तक- रमेश पटेल (बसपा)

वर्ष 2012 से 2015 तक- शिवशंकर सिंह यादव (सपा)

वर्ष 2015 से 2020 तक – मैना देवी यादव (सपा)

सात दिन के अंदर दे सकते हैं आपत्ति: जिला मजिस्ट्रेट शेषमणि पांडेय ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन- 2021 के ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के पदों का आरक्षण कार्यक्रम तय कर दिया गया है। जनपद स्तर पर आरक्षित ग्राम पंचायत प्रधानों व सदस्यों के लिए 20 फरवरी एक मार्च तक प्रस्ताव तैयार किया जाना। ग्राम पंचायत के आरक्षित प्रधानों, ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्य के आरक्षित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र वार्ड के आवंटन की प्रस्तावित सूची का प्रकाशन दो से तीन मार्च 2021 तक, प्रस्तावों पर आपत्तियां चार से आठ मार्च तक प्राप्त किया जाना है। आपत्तियों का जनपद मुख्यालय पर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में नौ मार्च को एकत्रीकरण,आपत्तियों का जनपद में गठित समिति से परीक्षण व निस्तारण और अंतिम रूप से सूची दस से 12 मार्च तक तैयार किया जाएगा। निर्वाचन क्षेत्रों वार्ड की अंतिम सूची का 13 से 14 मार्च तक प्रकाशन होगा। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत के स्थानों एवं पदों का आरक्षण और आवंटन का प्रस्ताव जनसाधारण की सूचना के लिए ग्राम पंचायत , क्षेत्र पंचायत , जिला पंचायत व जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के सूचना पट्ट पर किया जाएगा। प्रकाशन की तिथि से सात दिवस के अंदर प्रस्तावित आरक्षण के विरुद्ध आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं।

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