मध्य प्रदेश- मंगल को सीधी में बड़ा ‘अमंगल’, 55 यात्रियों से भरी बस नहर में समाई, अब तक 47 शव बरामद*

*मंगल को सीधी में बड़ा ‘अमंगल’, 55 यात्रियों से भरी बस नहर में समाई, अब तक 47 शव बरामद*

*07 लोगों को ग्रामीणों ने बचाया, सीधी से सतना परीक्षाएं देने आ रहे थे स्टूडेंट*
*मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हादसे पर जताया दुख, मुआवजे का ऐलान*
*हादसे के बाद गृहप्रवेशम कार्यक्रम सीएम ने किया रद्द घटनास्थल पर पहुंचे संभाग के अफसर व दो मंत्री*

*हादसे के बाद दुर्घटनास्थल पर दिन भर मचा रहा कोहराम, क्रेन से बाहर निकाली गई बस, ड्राइवर व कंडेक्टर की भी मौत*
*मृतकों में 22 पुरुष,18 महिलाएं और एक मासूम भी शामिल*

दबंग भोपाल,सीधी/सतना!®️ सीधी व आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मंगलवार बड़ा ‘अमंगल’ लेकर आया। मंगलवार को सुबह छ बजे सीधी बसस्टैंड से सतना के लिए तकरीबन 55 सवारियों को लेकर रवाना हुई बस बाणसागर की मुख्य नहर में जा गिरी। 80 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 7.30 बजे सामने आ रहे वाहन को साइड देने के दौरान रामपुर नैकिन के पास बस हादसे का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस की रफ्तार बहुत तेज थी, इस बीच सामने से आ रहे वाहन को बस चालक ने साइड देने की कोशिश की और स्पीड ब्रेकर से बस उछल कर 25 फिट गहरी नहर में जा गिरी। नहर में पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी भी यात्री को संभलने का मौका नहीं मिला और सब के सब बस में ही फंसे रह गये। हादसे की खबर लगते ही आस-पास के ग्रामीणों ने नहर में डूबी बस से यात्रियों को निकालने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाये और यू.पी व बिहार को पानी पहुंचाने वाली बाणसागर की मुख्य नहर ने 47 जाने लील लीं।

हादसे की सूचना मिलते ही आनन-फानन संभाग के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गये। जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सीधी में हुए बस हादसे की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत प्रशासनिक अफसरों को निर्देश देकर राहत व बचाव में जुट जाने के लिए कहा। सीएम मंगलवार को गृहप्रवेशम कार्यक्रम के लिए मिंटो हाल जाने वाले थे। गृहप्रवेशम का वर्चुअल लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को करना था परंतु जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की खबर पहुंची कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

*सात लोगों की बचाई जान*
हादसे के तुरंत बाद तैरकर बाहर आ रहे 7 लोगों को ग्रामीणों ने बचा लिया था। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है। उधर पीएम रिलीफ फंड से मृतकों के परिजनों को 2.2 लाख दिए जाएंगे व घायलों को 50 हजार रुपए।

*नहर में समा गई पूरी बस*
बाण सागर की मुख्य नहर इतनी गहरी है कि पूरी की पूरी बस उसमें समा गई। गोताखोरों और पुलिस प्रशासन ने बड़ी मशक्कत के बाद बस को क्रेन से बाहर निकाला और जैसे ही बस नहर से बाहर निकली उसने शव उगलने शुरू कर दिये। देर शाम तक 47 यात्रियों के शव बाहर निकाले जा चुके थे। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक रेस्कयू लगभग पूरा हो चुका है और नहर में अब हो सकता है इक्का-दुक्का शव फंसे हुए हों।
बस में बघवार, चोरगढ़ी समेत आसपास के भी यात्री सवार थे। बस हादसे को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सीधी कलेक्टर से बात की।

*जाम की समस्या से बचने के लिए मौत के रास्ते पर दौड़ा दी बस*
जानकारी के मुताबिक बधवार घाटी में लगने वाले जाम से बचने के लिए बस चालक ने जो शार्टकट रास्ता अपनाया उसने बस में सवार लोगों को मौत की राह तक पहुंचा दिया। बस छुहिया घाटी में दो दिन से लगे जाम की वजह से अपने तय रूट से ना जाकर इस मार्ग से जा रही थी। हादसे के बाद नहर के किनारे आस-पास के गांवों के सैकड़ों लोग एकत्र हो गये, और सभी अपने-अपने परिजनों की तलाश में जुट गये जिन्होने सतना पहुंचने के लिए उक्त बस के लिए टिकट ली थी। दुर्घटनास्थल के आस-पास के दृश्य भयावह थे। जैसे-जैसे बस से शव निकाले जा रहे थे चौतरफा कोहराम मच जाता था।

*रोजगार की तलाश में निकले, पहुंच गये मौत के मुंह में*

सीधी से सतना आ रही बस में अधिकतर संख्या में वे नवयुवक सवार थे जो सतना में आयोजित एनएएम एवं रेलवे में रोजगार पाने के लिए परीक्षा देने जा रहे थे। मंगलवार को ही सतना में एचडीएफसी बैंक में निकली वैकेंसियों के लिए साक्षात्कार भी था। लिहाजा बड़ी संख्या में सीधी व आसपास के ग्रामीण इलाकों के युवक बस द्वारा सतना आ रहे थे। उन्हें क्या पता था कि रोजगार की बजाय मौत उन्हें अपने आगोश में ले लेगी।

*32 सीटर बस में 38 टिकटें..!*
हासिल जानकारी के मुताबिक सिजहटा निवासी जबलानाथ परिहार ट्रैवल्स की बस 19पी.1883 32 सीटर है जबकि सीधी बस स्टैंड से 38 टिकटें बुक हो गई थीं। इसके अलावा रास्ते में भी बस चालक मिलने वाली सवारियां बैठाता रहा। जिससे बस ओव्हरलोड हो गई थी। बस का मालिक कमलेश्वर सिंह नामक व्यक्ति बताया गया है। इस हादसे में बस के चालक बालेंद्र विश्वकर्मा निवासी छतरपुर समेत कंडक्टर की भी मौत हो गई। कंडक्टर दिग्विजय सिंह चंदेल बस मालिक कमलेश्वर का रिश्ते में भांजा लगता है। हादसे के बाद परिवहन विभाग ने बस का परमिट तत्तकाल प्रभाव से रद्द कर दिया है। बताया जाता है कि परीक्षा में जल्दी पहुंचने के चक्कर में बस में 55 से ज्यादा लोग सवार हो गये थे।

डेढ़ घंटे बाद थी दूसरी बस
जिस बस ने 47 लोगों की जान ले ली उसमें सवारियां बैठाने के लिए अफरा-तफरी का माहौल था। परीक्षा देने जाने वाले युवकों की समस्या यह थी कि हादसे का शिकार हुई बस अगर वे छोड़ देते तो इसके रवाना होने के तकरीबन डेढ़ घंटे बाद दूसरी बस थी। हादसे वाली बस के तुरंत बाद एक और यात्री बस को परमिट दिया गया था परंतु कम सवारियों के चलते उक्त बस एक महीने से बंद थी। काफी देर बाद दूसरा साधन होने के चलते बस में लोग ठसाठस भर गये।

*दिल दहलाने वाले हौलनाक दृश्य*
घटनास्थल पर जब मौत की बस ने शव उगलने शुरू किये तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गये। आसपास फैले शवों के बीच परेशान परिजन चीख-पुकार करते हुए अपनों को ढूंढ रहे थे। चारों तरफ सिर्फ रुदन और क्रंदन का आलम था। शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पोस्टमार्टम के लिए अस्थायी जगह बनाई गयी व शवों का पोस्टमार्टम कर उन्हें परिजनों के सुपुर्द किया जाता रहा। देर शाम तक घटनास्थल पर दिल को चीर देने वाले रुदन का शोर सुनाई देता रहा।

*मौत के जबड़े से चार लोगों को छीन लाई 12 वीं छात्रा शिवरानी*

बस गहरी नहर में गिरी तो लोग बेबस हो गए लेकिन इस बीच देवदूत बनकर पहुंची छात्रा शिवरानी। उसने जान की परवाह न करते हुए अपने पांच स्वजन की मदद से बस में सवार चार यात्रियों को मौत के जबड़े से छीन लिया। घटनास्थल से करीब 300 मीटर दूर कक्षा 12वीं की छात्रा शिवरानी लुनिया उम्र 17 वर्ष अपने परिवार के साथ घर के बाहर बैठी हुई थी। उसने अपने घर के सामने से तेज रफ्तार बस को गुजरते देखा। उसी समय वह किसी अनहोनी से सहम उठी। चंद पलों में ही उसकी आशंका सच में बदल गई। बस उसके सामने ही नहर में गिर गई। जैसे ही बस नहर में गिरी तो वह अपने परिजनों के साथ घटनास्थल कीओर दौड़ पड़ी। शिवरानी को तैरना आता था उसने अपने परिजन लवकुश, सुरेंद्र, जगबंधन, रामपाल और धर्मपाल के साथ नहर में छलांग लगा दी। शिवरानी ने बताया कि यह वह पल था जब बस धीरे-धीरे नहर में ओझल हो रही थी। बस में पानी भरने लगा था। इसी बीच बस में सवार यात्री अनिल तिवारी, सुरेश गुप्ता, स्वर्णलता द्विवेदी, विभा प्रजापति,अर्चना जायसवाल, सुमन चतुवेर्दी, ज्ञानेश्वर चतुवेर्दी, पिंकी गुप्ता बस की खिड़की से निकलने की जद्दोजहद करने लगे। शिवरानी ने साहस दिखाते हुए साथियों की मदद से एक-एक कर चार यात्रियों को सुरक्षित निकाला और उनकी जान बचाई।
शिवरानी ने बताया कि विभा, अर्चना और सुमन को तैरना नहीं आता था। अर्चना के शरीर का आधा हिस्सा बस की खिड़की में फंसा हुआ था। शिवरानी ने झट से लवकुश की मदद से अर्चना को निकाला और नहर के ऊपर पहुंचा दिया। शिवरानी ने देखा कि विभा और सुमन भी पानी में डूब रही हैं। उसने अपने साथियों के साथ इन दोनों को निकालकर उनकी जान बचाई। स्वर्णलता द्विवेदी बस के पिछले हिस्से में फंसी हुई थी।वह खिड़की से निकलने की कोशिश में जुटी थी। रामपाल और धर्मपाल के साथ मिलकर स्वर्णलता को भी बाहर निकाल लिया।

*पिंकी की हुई अस्पताल में मौत*
शिवरानी ने अपने साथियों के साथ बस में सवार पिंकी गुप्ता को बस से जिंदा निकाला। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर पहुंचा दिया गया था, लेकिन उसके शरीर में काफी पानी जा चुका था। इसके चलते उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। पिंकी एएनएम की परीक्षा देने सतना जा रही थी।

*हिम्मत से दी मौत को मात*

अनिल तिवारी ने बताया कि जैसे ही बस नहर में डूबने लगे उन्होंने बस की बंद खिड़की को जोर से हाथ मारा, जिससे खिड़की का कांच टूट गया। उन्हें तैरना आता था। अनिल ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए बगल में बैठे सुरेश गुप्ता को बचाने को कोशिश की और उनका हाथ पकड़कर खिड़की से बाहर खींच लिया। सुरेश गुप्ता 62 वर्ष के हैं, तैरना भी कम जानते थे लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नहर का किनारा पकड़ लिया। करीब 300 मीटर दूर जाकर एक पत्थर मिला जिसके सहारे दोनों अपनी जान बचा पाए।

*सतर्कता से बचाई खुद की जान*
ज्ञानेश्वर चतुर्वेदी बस में सामने के कांच से आगे की ओर देख रहे थे। जैसे ही बस नहर में गिरने लगी तो उन्होंने खिड़की के कांच में पैर मारा और पानी में कूद गए। गनीमत यह रही कि वे बस के किसी हिस्से में नहीं फंसे। देखते ही देखते उनकी आंखों के सामने ही बस धीरे-धीरे डूब गई। वे नहर का किनारा पकड़कर तैरने लगे। तभी एक सीढ़ी मिली, जिसे पकड़कर ऊपर आ गए।

सीएम ने जताया शोक
सीधी में हुए बस हादसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ट्वीट कर कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को केन्द्र सरकार की ओर से दो लाख रुपए तथा राज्य सरकार की ओर से पाँच लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। दु:ख की घड़ी में हम पीड़ितों के परिजनों के साथ हैं। पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है। मेरी सबसे अपील है कि धैर्य रखें। मैं, राज्य सरकार और पूरी जनता आपके साथ हैं।

*मंत्री तुलसी सिलावट और राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल ने परिजन को दी सांत्वना*
मुख्यमंत्री की ओर से जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट तथा ग्रामीण विकास एवं पिछड़ावर्ग अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री राम खेलावन पटेल रीवा हवाई पट्टी में उतर कर दोपहर 2:40 बजे दुर्घटना स्थल पहुंचे। दोनों मंत्रियों ने दुर्घटना स्थल पर राहत और बचाव कार्य की समीक्षा की। मंत्रियों ने बताया कि दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिये गये हैं। दुर्घटना पीड़ितों को हर संभव सहायता दी जायेगी। दु:ख की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन पीड़ितों के साथ है। दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन सीधी की ओर से 10-10 हजार रुपए की सिहायता राशि मृतकों के परिजनों को दी गयी।

*बिना थके, बिना हारे बचाव कार्य में जुटा रहा प्रशासन*

बस दुर्घटना की सूचना मिलते ही रीवा संभाग के कमिश्नर राजेश कुमार जैन, आईजी उमेश जोगा तथा डीआईजी अनिल सिंह कुशवाह तत्काल दुर्घटना घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने राहत तथा बचाव कार्य की सतत निगरानी की। पुलिस होमगार्ड तथा एनडीआरएफ की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य किया। बाणसागर नहर का पानी तत्काल रोका गया। दुर्घटना स्थल पर सांसद सीधी श्रीमती रीति पाठक, विधायक चुरहट शरदेन्दु तिवारी एवं विधायक सिहावल तथा पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने राहत तथा बचाव कार्य की निगरानी की एवं मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी।

*सतना समेत तीन जिलों के कलेक्टरों ने संभाली कमान*
दुर्घटना पीड़ितों को सहायता देने एवं राहत तथा बचाव कार्य संपन्न कराने के लिए कलेक्टर सीधी रवीन्द्र चैधरी, कलेक्टर सतना अजय कटेसरिया, कलेक्टर रीवा डॉ इलैयाराजा टी, एसपी सीधी पंकज कुमवात, एसपी रीवा राकेश कुमार सिंह, एसपी सतना धर्मबीर सिंह दुर्घटना स्थल पर मौजूद रहे। दुर्घटना पीड़ितों को सहायता देने के लिए डॉक्टरों का दल तैनात रहा।
उप संपादक रमेश रैकवार की रिपोर्ट

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