लखनऊ. पैसे का आना और उसका जाना, इसी को बजट बोलते हैं.News11india tv उप सम्पादक रमेश रैकवार

लखनऊ. पैसे का आना और उसका जाना, इसी को बजट बोलते हैं. यूपी सरकार ने भी बजट (UP Budget 2021) में बताया है कि राज्य के पास पैसे कहां से, कितने आते हैं और कहां जाते हैं. आप भी एक झलक में इस गणित को समझ जाएंगे. सरकार (Government) बकायदा इसे बजट के जरिए बताती है, तो आप भी समझिए. उदाहरण के लिए एक रुपये को मानक मानेंगे. सबसे पहले जानते हैं कि सरकार के पास रुपया कहां-कहां से और कितना आता है.सरकार के पास कमाई का सबसे बड़ा जरिया टैक्स है. एक रुपये को मानक मानें तो सरकार को 34.5 पैसे अपने संसाधनों से जमा टैक्स से मिलता है. जबकि कमाई का दूसरा सबसे बड़ा जरिया है केन्द्र सरकार द्वारा दिया गया टैक्स में हिस्सा. 1 रुपये में से 22.1 पैसा केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी से मिलता है. इसके अलावा केन्द्र सरकार से सहायता अनुदान के जरिए यूपी को 16.2 पैसे मिलते हैं. कर्ज के जरिये राज्य को 14 पैसे मिलते हैं. इसके अलावा समस्त लेन-देन के शुद्ध परिणाम के तहत राज्य को 7 पैसे हासिल होते हैं. टैक्स के अलावा दूसरे संसाधनों से, जिसे करेत्तर राजस्व कहते हैं, राज्य को 4.7 पैसे मिलते हैं. लोक लेखा शुद्ध से 1 पैसे की कमाई होती है. इसके अलावा 0.1 पैसा आकस्मिकता निधि से मिलता है. जबकि 0.4 पैसा कर्ज और अग्रिम वसूली से मिलता है.
रुपया कहां और कितना जाता है
राज्य को सबसे ज्यादा पूंजीगत परिव्यय पर खर्च करना पड़ता है. साल 2021-22 में इस पर यूपी 1 रुपये में 21.1 पैसा खर्च करेगा. सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर 13.7 पैसा, तो सहायता प्राप्त संस्थाओं के वेतन पर 13 पैसा खर्च होगा. पेंशन पर 12.7 पैसा खर्च होगा. 8.2 पैसा यूपी को सहायता अनुदान पर खर्च करना होगा. इसके अलावा कर्जे के ब्याज के रूप में उसे 1 रुपये में 8.1 पैसा खर्च करना होगा. तमाम योजनाओं के तहत जो सब्सिडी दी जाती है उस पर 3.4 पैसा खर्च होगा. स्थानीय निकायों के समनुदेशन पर 3 पैसा खर्च होगा. कर्जों के प्रतिदान पर 5.3 पैसा खर्च होगा. वहीं, कर्ज एवं अग्रिम पर भी 0.5 पैसा खर्च करना होगा. इसके अलावा 11 पैसा अन्य राजस्व व्यय के लिए देना होगा.बता दें कि इस बार योगी सरकार का कुल बजट 5 लाख 50 हजार 270 करोड़ का है. जबकि 2020-21 में बजट 5.12 लाख करोड़ रुपये का था. प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े इस बजट का आकार पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 37,410 करोड़ रुपये अधिक है. यह प्रदेश का पहला दस्तावेज रहित बजट भी है. इसमें किसानों की आय दोगुनी करने, सरकारी नलकूपों से मुफ्त पानी उपलब्ध कराने और सहकारी समितियों से रियायती दर पर फसली कर्ज उपलब्ध कराने सहित किसान कल्याण के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई है.

[News 11 India TV]
[ब्यूरो रिपोर्ट विश्व नाथ पाण्डेय]

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