*सोसल मीडिया का अनावश्यक और असीमित उपयोग भी मानसिक रोग का बहुत बड़ा है कारण* — डां मिलिंद

*सोसल मीडिया का अनावश्यक और असीमित उपयोग भी मानसिक रोग का बहुत बड़ा है कारण* — डां मिलिंद

डां मिलिंद देवगाँवकर प्रोफेसर न्यूरो सर्जरी विर्जिनिया यूनिवर्सिटी, यू एस ए तथा मेडिकल डारेक्टर, आरोग्य धाम ने बताया की
‘मन’ शब्द से हम सभी परिचीत है। परंतु मन क्या होता है, कहा होता है यह कोई नही जानता।एक न्युरॉलॉजीस्ट होते हुए भी, और मस्तिष्क के हजारो शस्त्रक्रीयाओं के बाद भी, मन हमे कभी मानवी शरीर मे दिखाई नही दिया।उसका मुलभूत कारण यह की, मन कोई ईंद्रीय नही है। मन एक परिकल्पना है, एक चित्र, एक प्रतिमा है जो हमारा ब्रेन, हमारी बुद्धी साकार करती है। जन्म के बाद, बालक को थोडे समय में ही अनेक नये अनुभव प्रतित होते है।बढते उम्र के साथ अनेक अनुभव, अनुभुतीयां आती है।पंचेद्रीयों से दी गयी ये सब जानकारी को समझ के, जोड के, उसका सारांश इकठ्ठा करके, बुद्धी के सामने सादर जो करता है वह है मन. जब कभी यह जानकारी हमारे संदर्भों के दायरे के बाहर होती है। अनाकलनीय होती है। तो उसका उचित अर्थ ना समझने से भ्रम हो जाता है।यही जनक है मनोविकार का.
मन पर बुद्धी का अंकुश होना जरूरी है। हमारे शरीर के रथ के पांच घोडे यानी पंचेंद्रीय है। दो पहीये यानी अहं की भावना है, पर सारथी बुद्धी ही होनी चाहीये और मन उसमे सवारी करता है।अगर सारथ्य मन ने किया तो वह रथ लालसा की दिशा मे बढता है और वही मनोविकार की पहली कडी है। इसलिये भगवान गीता मे कहते है,
‘‘इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्य: परं मन:।
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धे: परतस्तु स:।।’’
इंद्रियोंसे मन श्रेष्ठ है, मनसे बुद्धी श्रेष्ठ है और बुद्धीसे आत्मस्वरूप श्रेष्ठ है.

*मनोविकार के लक्षण* —

मनोविकार अनेक प्रकार के होते है। बालकोंमे, बुद्धी कम होना (intellectual disability), सामाजीक आदान प्रदान का ह्रास (autism), ध्यान का अभाव और अत्यंत सक्रीयता (ADHD), पढाई मे ध्यान ना देना। इन लक्षणों का बाहूल्य होता है। प्रौढों मे खुद से ही बाते करना, अकेले मे हसना या रोना, बात ना करना, नींद ना आना, उलझन, घबराहट, मतिभ्रम होना, सुनने, देखने, चखने, सूंघने, महसूस करने वाली चीजें जो वास्तविक नहीं हैं उन्हे महसूस करना, भ्रम यानी विश्वास या विचार जो सत्य नहीं हैं उसपे विश्वास करना, असामान्य विचार या विचार, असामान्य शरीर की हलचल, ध्यान केंद्रित करने या कार्यों को पूरा करने में कठिनाई, भावनाओं की अभिव्यक्ति में कमी, गतिविधियों / समाजीकरण में रुचि का ह्रास, अविवेकी भाषण, दूसरों पर बेवजह शंका, व्यक्तिगत स्वच्छता का अभाव, नींद का समय या खाने की आदतों मे बदलाव. इस प्रकार के अनेक लक्षणं हो सकते है मनोविकार के।

*मनोविकार के कारण* —

मनोविकार आम तौर पर किसी व्यक्ति के जीवन के अनुभवों के संयोजन के कारण होती है। तनावपूर्ण घटनाओं, पदार्थों का उपयोग या यहां तक कि शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिति भी मनोविकार उत्पन्न कर सकती है।कुछ मनोविकार अनुवांशीक जरूर होते है। पर ज्यादातर का कारण किसी प्रकार का मानसीक तनाव ही होता है।कुछ कारण वृत्तीक, शारीरीक गठन पर अवलंबीत होते है।आपसी संबंधों में तनाव, प्रिय व्यक्ति की मृत्यु, सम्मान को ठेस, कार्य को खो बैठना, आर्थिक हानि, विवाह, तलाक, शिशु जन्म, कार्य-निवृत्ति, परीक्षा या प्यार में असफलता इत्यादि भी मनोरोगों को उत्पन्न करने या बढ़ाने में योगदान देते हैं।कुछ कारण सामाजीक तथा सांस्कृतीक भी होते है जैसे की सामाजिक एवं मनोरंजक गतिविधियों से दुराव, अकेलापन, राजनीतिक, प्राकृतिक या सामाजिक दुर्घटनाएं आदि। आज के युवा वर्ग मे सोशल मीडीया का अनावश्यक और असिमीत उपयोग भी इसका एक कारण है। विद्यार्थीयोंसे पालकोंकी बढती हुई अपेक्षांये भी मानसीक तनव का कारण बन सकती है।

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