कानपुर-आबकारी व पुलिस का कम होता इकबाल,शराब माफियाओं के बढ़ते हौसले! पंचायती चुनाव में जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन सकती है नकली शराब की बिक्री

आबकारी व पुलिस का कम होता इकबाल,शराब माफियाओं के बढ़ते हौसले!

पंचायती चुनाव में जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन सकती है नकली शराब की बिक्री

नकली शराब निर्माताओं के बीच क्या इलाकाई पुलिस व आबकारी विभाग का इकबाल कम होता जा रहा है। यह सवाल आज करीब-करीब हर एक व्यक्ति पूछ रहा है। अवैध बनने वाली शराब पकड़ी जा रही है लेकिन शराब का बन्ना बंद नहीं हो रहा, जिससे साफ जाहिर है कि कहीं ना कहीं दोनों विभागों का या तो इकबाल कम हो गया है या फिर इसके पीछे कोई ना कोई जेब भरो अभियान जैसी साजिश है।
पंचायती चुनाव का नगाड़ा बज चुका है। आरक्षण की नीति स्पष्ट हो जाने के बाद उम्मीदवारों ने अपना अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है। पंचायती चुनाव में शराब जैसे मादक पदार्थों का बोलबाला रहता है। शराब असली हो या फिर नकली उम्मीदवार इसी के सहारे चुनाव की वैतरणी पार करना चाहता है। इसी बात को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से नकली शराब बनाने व बिक्री पर रोक लगाने की हर एक कोशिश में जुटा है। लेकिन क्या नकली शराब बनना बंद हो गया है या गैर जनपद से आने वाली शराब की खेप नहीं आ रही यह सवाल न केवल आबकारी विभाग के सामने पहाड़ की तरह खड़ा है बल्कि जनपद की पुलिस के लिए भी है चुनौती बना है।

ऐसा नहीं है कि नकली शराब बनाने वालों पर कार्रवाई न की जा रही हो,नकली शराब बरामद न हो रही हो, बनाने वाले पकड़े न जा रहे हो शराब बनाने में उपयोग होने वाला समान पकड़ा न जा रहा हो और दोनों विभाग वाहवाही लूट न रहे हो लेकिन क्या नकली शराब बनना बंद हो गया या फिर गैर जनपद से आने वाली शराब पर रोक लगाई जा सकी है। सब कुछ जैसा था वैसा ही चल रहा है। शराब माफियाओं के हौसले बुलंद है। यूं कहें कि एक तरफ नकली शराब की बरामदगी कर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने वाहवाही लूटना तो दूसरी तरफ चोर दरवाजा खोल कर शराब माफियाओं को मौका देना भी कहा जा सकता है।
पुलिस और आबकारी के बीच शराब माफिया विगत कई सालों से चोर सिपाही का खेल खेलते आ रहे हैं और प्रति माह लाखो रुपए का वारा न्यारा करते आ रहे हैं। सरकार को भी प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे है। पियक्कडो के बीच हमेशा नकली शराब खतरा बनी रहती है। ऐसे में क्या आबकारी विभाग और इलाकाई पुलिस से सवाल नहीं पूछना चाहिए की आए दिन शराब की बरामदगी हो रही है तो फिर शराब बनाने वाले कहां से आ रहे हैं गैर जनपद से आने वाली शराब की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लग पा रही। क्या इन विभागों का इकबाल कम हो गया है या फिर कुछ और माजरा है।

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