अपराध , अराजकता और काली कमाई का अड्डा बनी शराब दुकानों की अवैध कैन्टीनें कानपुर। शहर में अपराध, अराकता का माहौल इस कदर बन गया है कि कानून का किसी को कोई भय नही। खुलेआम शराब की दुकानो पर अवैध कैन्टीने मधुषाला बन कर रह गयी है। न तो थाना पुलिस ही कुछ करती है और न ही आबकारी विभाग

अपराध , अराजकता और काली कमाई का अड्डा बनी शराब दुकानों की अवैध कैन्टीनें
कानपुर। शहर में अपराध, अराकता का माहौल इस कदर बन गया है कि कानून का किसी को कोई भय नही। खुलेआम शराब की दुकानो पर अवैध कैन्टीने मधुषाला बन कर रह गयी है। न तो थाना पुलिस ही कुछ करती है और न ही आबकारी विभाग


शाम होते ही शराब की दुकानो के अगल बगल बनी अवैध कैन्टीने लोगो का शराब पिलाने में लगी हुई है। खुले में शराब पीना अपराध और अराजकता को बढ़ावा देता है। त्योहारो के आने पर केवल अपनी वसूली के लिये सख्ती करते सभी विभाग दिखायी पड जायेंगे,लेकिन वास्तविकता तो यह है कि पूरे वर्ष भर न तो आबकारी विभाग को कार्यवाही करने का समय मिलता है और न ही पुलिस विभाग को। क्षेत्रीय लोगो का तो सीधा आरोप है कि पुलिस की संरक्षण में ही ऐसे अवैध कैन्टीने संचालित होती है जिनका न तो कोई बार लाइसेंस है और न ही जिला आबकारी अधिाकारी की कोई अनुमति। बावजूद इसके धड़ल्ले से शराब की दुकानो के पास अपनी अवैध कैन्टीनो को संचालन बेधड़क होकर कर रहे है। मामला यही नही रूका है, शराब पिलाने के लिये ठेलो खोमचे वाले भी चन्द रूपये लेकर खुले में शराब पिलाते है। शाम ढ़लते ही इसका नजारा काकादेव,विजय नगर,फजलगंज, जरीब चैकी, मूलगंज, परेड गोविन्द नगर, ग्वालटोली, बर्रा, नौबस्ता समेत कई क्षेत्रों में देखा जा सकता है। बिरयानी की दुकानो से लेकर फ़ास्टफूड तक वाले जाम पिलाने में कोई गुरेज नही रकते है। पूछने पर उनका साफ कहना रहता है कि हम थाने और चौकी में महीना देते है। अब ऐसे में काली कमाई का अड्डा बन चुकी ये शराब दुकाने चैराहो पर कत्लेआम कराने से बाज नही आयेंगी।

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